अबे, पहले तो ये बता तू है कौन?
तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं,
मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है,
चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का नहीं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
जिंदगीभर पकते रहे यह सुनते-सुनते कि नेगेटिव नहीं हमेशा पौजेटिव सोचो, काश कि जमाने को अस्पताल का यह दस्तूर भी पता होता कि नेगेटिव आए तो सही...
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