मायके ठहरने का वक्त बिटिया जानती है, ज्यादा न रुक पाएगी,
हेमंत ऋतु भी आई, कल शिशिर भी वसंत संग चली जाएगी।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
खुदगर्जी के वास्ते न कभी किसी को बदनाम किया तूने, किसी की भी उपलब्धियों को न कभी अपने नाम किया तूने, क्योंकि तू इक हद की हद तक परचेत था ...
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