Tuesday, January 13, 2026

छंद

पर्व लोहड़ी का था

और हम आग देखते रहे,

उद्यान राष्ट्रीय था और

हम बाघ देखते रहे।

ताक में बैठे शिकारी

हिरन-बाज देखते रहे,

हुई बात फसल कटाई की,

हम अनाज देखते रहे।

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श्रद्धांजलि!

वो बिन वजह हंसना तेरा,  वो बिन वजह रोना तेरा, जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी -मेरी कहानी है।  इक प्यार का नगमा.... #आशाभोंसलेविनम्रशर्द्दाजली!