यूं तो इस मेरे किरदार को,
अंधेरों से हमेशा शिकायत ही रही,
किंतु चलता चला गया,
नुक़्स भी मिले, दिशा भी मिली।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
यूं तो इस मेरे किरदार को, अंधेरों से हमेशा शिकायत ही रही, किंतु चलता चला गया, नुक़्स भी मिले, दिशा भी मिली।
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