यूं तो इस मेरे किरदार को,
अंधेरों से हमेशा शिकायत ही रही,
किंतु चलता चला गया,
नुक़्स भी मिले, दिशा भी मिली।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
मत दिया कर दोष तू हमको दरारों में झांकने का , ऐ दोस्त! तेरी नादानियों का खामियाजा, भला ये, तमाम जमाना क्यों भुगते?
वाह
ReplyDelete🙏🙏
ReplyDeleteNice Post.
ReplyDeletechaupai sahib path in hindi