Friday, January 16, 2026

अफसोस।

 दिन-रात हो कि सुबह-शाम बस,

यही अफसोस कचोटता है हाए,

ऐ जिंदगी तुझे हम तमाम उम्र,

बड़े सलीके से नहीं रख पाए।

1 comment:

  1. कोशिश जारी रखिए सलीका आ जाएगा :)

    ReplyDelete

कुपत

तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे हम, तुम्हारे बाप के पास, घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि  बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।