दिन-रात हो कि सुबह-शाम बस,
यही अफसोस कचोटता है हाए,
ऐ जिंदगी तुझे हम तमाम उम्र,
बड़े सलीके से नहीं रख पाए।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
वो बिन वजह हंसना तेरा, वो बिन वजह रोना तेरा, जिंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी -मेरी कहानी है। इक प्यार का नगमा.... #आशाभोंसलेविनम्रशर्द्दाजली!
कोशिश जारी रखिए सलीका आ जाएगा :)
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