अफसोस।

 दिन-रात हो कि सुबह-शाम बस,

यही अफसोस कचोटता है हाए,

ऐ जिंदगी तुझे हम तमाम उम्र,

बड़े सलीके से नहीं रख पाए।

Comments

  1. कोशिश जारी रखिए सलीका आ जाएगा :)

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