गैर समझा करते थे जिन्हें हम,
दिल ने उन्हें कुछ इसतरह अपनाया,
दूर भाग खड़ी हुई तन्हाई हमसे,
हम अकेले को जब मिला हमसाया ।
फिर वो हमसाया कुछ यूं हमें भाया,
तमाम जिंदगी की पलट गई काया,
जिन परछाइयों से डरते थे कभी हम,
आखिर,उन्हीं परछाइयों ने हमें अपनाया।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
सांझ ढले, मेरे साथ बैठकर एक पैग व्हिस्की, कभी वो संग-सग पीती थी, जब न तो आभासी दुनिया थी, और ना ही वो इस कदर , अलग ही दुनियां में बहकर जीती...
सुंदर
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