Friday, January 9, 2026

खुदानाखास्ता

गैर समझा करते थे जिन्हें हम,

दिल ने उन्हें कुछ इसतरह अपनाया,

दूर भाग खड़ी हुई तन्हाई हमसे,

हम अकेले को जब मिला हमसाया ।


फिर वो हमसाया कुछ यूं हमें भाया,

तमाम जिंदगी की पलट गई काया,

जिन परछाइयों से डरते थे कभी हम,

आखिर,उन्हीं परछाइयों ने हमें अपनाया।

 

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इल्तज़ा

  मोहब्बत मे, आंखों मे भर आए आंसुओं को गिरने न देना 'परचेत', क्योंकि प्यार के आंसू ही रूह की खुराक होते हैं।