मिले न 'फूल' तो हमने
'चतुरों' से दोस्ती कर ली,
मजबूरी का नाम गांधी,
जिंदगी यूं ही बसर कर ली।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
मिले न 'फूल' तो हमने 'चतुरों' से दोस्ती कर ली, मजबूरी का नाम गांधी, जिंदगी यूं ही बसर कर ली।
No comments:
Post a Comment