यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

कहाँ पंगा ले रहे हो गोदियाल जी? :)
ReplyDeleteआज पाटिल के प्रतिभावान कारनामे पढ़कर मन व्यथित हुआ... लगा की हद है यार. किसी की नन्ही सी बेटी के साथ दुराचार किया उस अपराधी को माफ़ी देने का हक किसे है?
ReplyDeleteएक ही परिवार के १०-१० लोगों की हत्या करने वाले को माफ़ी देने का हक किसे है और क्यों है?
:)
ReplyDeleteआमजन का उठ गया है इस व्यवस्था पर से भरोसा,
ReplyDeleteये भरोसा तो कब का उठ चुका है ... पर वोट के अलावा कुछ हाथ में नहीं है आम आदमी के ... और वोट कों वो बेचारा इस्तेमाल करे या भूखा प्रेत भरने के लिए बेच दे ...
यही सब पुनः घृणित वातावरण निर्माण करेंगे।
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