Friday, May 17, 2024

वक्त आ गया है !

वतन-ए-हिंद से लग्न लगानी है तो,

वक्ष पे 'राम' लगाना होगा।

'धर्म-निरपेक्षता' की कपट प्रवृत्ति को

अब 'वीराम' लगाना होगा ।।

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गुस्सा

अपनी हर परेशानी का सबब, मैं तेरे मूंह पे फेंक देता, गर ये कश्ती का मुसाफिर 'परचेत', समंदर देख लेता।