वतन-ए-हिंद से लग्न लगानी है तो,
वक्ष पे 'राम' लगाना होगा।
'धर्म-निरपेक्षता' की कपट प्रवृत्ति को
अब 'वीराम' लगाना होगा ।।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे, क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे, पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत', मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे...
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