Tuesday, February 10, 2026

वाहियात

आज उन्होंने जैसे मुझे, 

पानी पी-पीकर के कोसा,

इंसानियत से 'परचेत', 

अब उठ गया है भरोसा।


3 comments:

  1. आपने कम शब्दों में गहरा दर्द रख दिया। जब अपना ही कोई बार-बार कोसता है, तब भरोसा सच में हिल जाता है। आपने “पानी पी-पीकर” वाला मुहावरा इस्तेमाल करके गुस्सा और कटाक्ष दोनों दिखा दिए।

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कुपत

तुम्हें पाने की चाह में मुद्दतों बैठे रहे हम, तुम्हारे बाप के पास, घंटों पैर दबाए मगर क्या मजाल कि  बुड्ढे को हुआ हो जरा भी एहसास।