आज उन्होंने जैसे मुझे,
पानी पी-पीकर के कोसा,
इंसानियत से 'परचेत',
अब उठ गया है भरोसा।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
मैं अभी सो रहा हूं, मर्जी के हिसाब से, मर्जी के हिसाब से मुझे जागना है, तुम मत रुको मेरे लिए, ऐ ज़िन्दगी, भाग लो, जितनी तेजी से तुम्हें भा...
आपने कम शब्दों में गहरा दर्द रख दिया। जब अपना ही कोई बार-बार कोसता है, तब भरोसा सच में हिल जाता है। आपने “पानी पी-पीकर” वाला मुहावरा इस्तेमाल करके गुस्सा और कटाक्ष दोनों दिखा दिए।
ReplyDelete🙏🙏
Deleteसटीक
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