ज्ञानदत्त पांडे ने लडावो और राज करो के तहत कल बहुत ही घिनौनी हरकत की है. आप इस घिनौनी और ओछी हरकत का पुरजोर विरोध करें. हमारी पोस्ट "ज्ञानदत्त पांडे की घिनौनी और ओछी हरकत भाग - 2" पर आपके सहयोग की अपेक्षा है.
कृपया आशीर्वाद प्रदान कर मातृभाषा हिंदी के दुश्मनों को बेनकाब करने में सहयोग करें. एक तीन लाईन के वाक्य मे तीन अंगरेजी के शब्द जबरन घुसडने वाले हिंदी द्रोही है. इस विषय पर बिगुल पर "ज्ञानदत्त और संजयदत्त" का यह आलेख अवश्य पढें.
क्या कहा? एक सौ पच्चीस करोड लोगों का भला हो जायेगा? अजी वो किस देश में जायेगा? किस देश की जनसंख्या एक सौ पच्चीस करोड है? ओहो शायद चीन की। लेकिन आपको कैसे पता कि वो चीन ही जायेगा?
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य में अन्याय होता दिखाई न दे, तो फिर क्या ऐसे नजरों से लाचार प्रतिनिधि को राजा बने रहने का कोई हक़ है? यदि उसे हमेशा किसी तीसरे ने ही आकर जगाना है, तो पूरे जंगलात के लिये यह निश्चिततौर पर एक बड़ी चिंता का विषय है। और इससे भी महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि क्या उसे जगाने वाला भी वाकई ईमानदार प्रयास कर रहा है, या सिर्फ खानापूर्ति, ताकि सिर्फ सुहानुभूति बटोरने के लिए जंगल की तमाम वादी की आँखों मे धूल झोंक सके ? और ठीक इसी सन्दर्भ में श्रीमती सोनिया गांधी के उस पत्र को भी रखा जा सकता है, जो उन्होंने कल इस देश के प्रधानमन्त्री श्री मनमोहन सिंह को लिखा और जिसमे उनसे यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि आईएएस अधिकारी सुश्री दुर्गा शक्ति के साथ कोई अन्याय न हो। उत्तर प्रदेश में बैठे...
मुझे चाहिए इक ऐसा खोता, जब मैं चांहू तब उसे जोता। ढेंचू-ढेंचू करता वो दौड़ा आये, जब दूं समीप आने का न्योता। मुझे चाहिए इक ऐसा खोता..... कूल रहे हमेशा, जहां तक हो, किसी बड़े स्कूल से स्नातक हो, बोल न बोले कोई दिल चुभो ता, मुझे चाहिए इक ऐसा खोता..... ऋतु मुताबिक गाना गाना जाने, हर व्यंजन,पकवान पकाना जाने, कभी भी ऐन वक्त पे मिले न सोता, मुझे चाहिए इक ऐसा खोता.....
बहुत शानदार....
ReplyDeletesahi kaha sirji...
ReplyDeleteपर वह भला और समझदार है कौन?
ReplyDeleteसादर वन्दे !
ReplyDeleteप्राब्लम ये है की दोनों नहीं हो रहा है, ना भला आदमी जा रहा है ना सबका भला हो रहा है, भगवान करे की सबका भला हो |
रत्नेश त्रिपाठी
हा हा!! सटीक!
ReplyDeleteभला और ईमानदार इंसान?? बेचारा लाचार है, ओर देश का सत्यानाश हो रहा है... जी नही ऎसा भला और ईमानदार इंसान हमे नही चाहिये वरना देश का भट्टा बेठ जायेगा
ReplyDeleteकब जा रहा है ये भला और समझदार आदमी ?
ReplyDeleteवैसे कोई सच में है जो जाने वालो में आएगा.......?मतलब.......
ReplyDeleteकुंवर जी,
यह हुई ना काम की बात!
ReplyDeleteबहुत बढ़िया
ReplyDeleteज्ञानदत्त पांडे ने लडावो और राज करो के तहत कल बहुत ही घिनौनी हरकत की है. आप इस घिनौनी और ओछी हरकत का पुरजोर विरोध करें. हमारी पोस्ट "ज्ञानदत्त पांडे की घिनौनी और ओछी हरकत भाग - 2" पर आपके सहयोग की अपेक्षा है.
ReplyDeleteकृपया आशीर्वाद प्रदान कर मातृभाषा हिंदी के दुश्मनों को बेनकाब करने में सहयोग करें. एक तीन लाईन के वाक्य मे तीन अंगरेजी के शब्द जबरन घुसडने वाले हिंदी द्रोही है. इस विषय पर बिगुल पर "ज्ञानदत्त और संजयदत्त" का यह आलेख अवश्य पढें.
-ढपोरशंख
हा हा!! बहुत शानदार....
ReplyDeleteबहुत मोह लिया जी इस भले और ईमानदार इन्सान ने
ReplyDeleteअब इनके जाना से ही देश का भला है।
प्रणाम
क्या कहा? एक सौ पच्चीस करोड लोगों का भला हो जायेगा? अजी वो किस देश में जायेगा? किस देश की जनसंख्या एक सौ पच्चीस करोड है? ओहो शायद चीन की।
ReplyDeleteलेकिन आपको कैसे पता कि वो चीन ही जायेगा?