यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

दिखा पिछाड़ी जो रहा, रविकर वही अमूर्त |
ReplyDeleteदो कौड़ी में बिक गया, लेता ग्राहक धूर्त |
लेता ग्राहक धूर्त, राष्ट्रवादी यह खोता |
खोता रोता रोज, यज्ञ आदिक नहिं होता |
खुली विदेशी शॉप, खींचता उनकी गाड़ी |
बनता लोमड़ जाय, अनाड़ी दिखा पिछाड़ी ||
कार्टून कुछ नहीं, बहुत कुछ बोलता है!
ReplyDeleteआजकल के अधिकाँश नेता (कुछ एक ), को छोड़कर मूर्खों की जमात के ही हैं ! सब कुछ बोलेंगे लेकिन मुद्दे पर स्थिर कभी नहीं रहते ! कब डंकी से हॉर्स पर स्विच कर ,जाते हैं पता ही नहीं लगता .
ReplyDeleteदमदार आर्थिक सोच यहीं से लागू की जा सकती है..
ReplyDeleteAnimals have been better-offs.
ReplyDeleteकमाल की प्रस्तुती
ReplyDeleteअसल् बात तो यह है की मेले में एक से एक बड़े गधे आये हैं तो वे बोलेंगे क्या |वे तो एक सुर में राग अलाप सकते हैं |
ReplyDeleteआशा