...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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वाहियात
आज जैसे उन्होंने मुझे, पानी पी-पीकर कोसा, इंसानियत से 'परचेत', अब उठ गया भरोसा।
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को, बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे। ...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...

हा हा
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ReplyDeleteसुन्दर |
आभार ||
:)) :D ;D :P
ReplyDeleteमेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत हैं ...
http://rohitasghorela.blogspot.in/2012/11/blog-post_6.html
:)
ReplyDeleteएक खबर जो शायद खबर न बनी - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
अरे भाई धन्यवाद और नमस्ते | आपके 'फॉर एंड ओन बिहाफ' उल्लेख से मेसर्स लाला परमानंददास एंड सन्स अत्तर के व्यापारी याद आ गए जिनकी दूकान के पास से एक दिन गुजरना हुआ |
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