यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

हा हा
ReplyDelete
ReplyDeleteसुन्दर |
आभार ||
:)) :D ;D :P
ReplyDeleteमेरी नई पोस्ट पर आपका स्वागत हैं ...
http://rohitasghorela.blogspot.in/2012/11/blog-post_6.html
:)
ReplyDeleteएक खबर जो शायद खबर न बनी - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
अरे भाई धन्यवाद और नमस्ते | आपके 'फॉर एंड ओन बिहाफ' उल्लेख से मेसर्स लाला परमानंददास एंड सन्स अत्तर के व्यापारी याद आ गए जिनकी दूकान के पास से एक दिन गुजरना हुआ |
ReplyDelete