Wednesday, October 12, 2022

गूढ



नेपथ्य आपका कुठौर,अलहडपन हमारा ठौर था,

आज जो येह जमाना है, कल समय कुछ और था,

इतराओ बुलंदियों पे अपनी, मगर ये भी मत भूलो !

अभी वक्त है आपका तो कभी हमारा भी दौर था।




2 comments:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13.10.22 को चर्चा मंच पर चर्चा - 4580 में दी जाएगी
    धन्यवाद
    दिलबाग

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  2. वाह्य, क्या बात है।
    अप्रतिम।

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कश्मकश

खुबसूरत सपने हमने भी सजाए थे, क्योंकि हम भी कभी फितरत वाले थे, पूरे न हुए वो अलग बात है, 'परचेत', मगर ख्वाब तो हमनें भी बहुत पाले थे...