...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
कश्मकश
सबब खामोशी, तेरा बहाना अच्छा है, इश्क़ हुआ मगर इजहार न किया, अंदाज़े मोहब्बत छुपाना अच्छा है, शकून भले न मिले दिल जलाना अच्छा है।
-
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
-
नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
-
तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

ज़बरदस्त 'झटका' है ... आपका यह कार्टून जो आम आदमी को रोज़ 'हलाल' होता दिखा रहा है !
ReplyDeleteगोदियाल भाई ,मुबारक हो !
ReplyDeleteअंधड में भी सही !बहुत सही देख लिया आपने :-) ......
जनता तो हमेशा से ही हलाली का बकरा बनी हुई है और बनी रहेगी जब तक वह खुद इस निजाम को ध्वस्त नहीं कर देती है।
ReplyDeleteलाजवाब ज़बरदस्त
ReplyDeleteसंजय भास्कर
आदत....मुस्कुराने की
विदेश जाने की इच्छा छोड़ दे
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
सीधा खचैक ...। बहुत बढिया
ReplyDeleteMorphic resonance.... मैं भी ठीक इसी विषय पर र्काटून बनाने की सोच रहा था :) आपने मेरा काम कर दिया धन्यवाद
ReplyDeleteWAAH...
ReplyDeleteअपनी च्वॉयस तो झटका है, लेकिन हमें कौन पूछत है? :)
ReplyDeleteलजवाब सटीक झटका....
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार के चर्चा मंच पर भी की गई है! सूचनार्थ!
ReplyDeleteआम आदमी तो बलि का बकरा ही है ।
ReplyDeleteगोदियाल जी , कार्टून बहुत अच्छे बना लेते हैं आप ।
बधाई ।
आपका ये झटका तो सच में झटका दे गया ...
ReplyDeleteअब तो झटके और टांगे आम नहीं है :) आदमी तो आम की तरह निचोडा जा रहा है॥
ReplyDelete