यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

इस कार्टून प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
ReplyDeleteयदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
waah !
ReplyDelete.... पर अंकल मिलेंगे कहां??
ReplyDeleteहा-हा-हा-हा चंद्रमौलेश्वर जी , आपकी मंशा भी कुछ नेक लग रही है :)
ReplyDeleteदुःख हुआ कल टी वी पर देखकर । एक व्यक्ति को अर्थव्यवस्था के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता ।
ReplyDeleteडा० साहब, क्या कहना चाह रहे है आप ? कि सबको थप्पड़ मारो :)
ReplyDeleteगोदियाल जी , गुनहगार तो भरे पड़े हैं । लेकिन क्या एक विक्षिप्त मनुष्य के थप्पड़ से कुछ हासिल होने वाला है ?
ReplyDeleteबहुत खूब सूरत है जिसने भी छठा मारा किसी ब्याक्तिगत शत्रुता के नाते नहीं मारा यह सब देश हित में है.
ReplyDeleteGood one ....
ReplyDeleteआपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आइये और अपने अनमोल संदेशों के द्वारा हमारा उत्साह बढाइये/आप हिंदी की सेवा इसी तरह अपने मेहनत और लगन से लिखी गई रचनाओं द्वारा करते रहें यही कामना है /आभार /लिंक नीचे दिया गया है /
ReplyDeletehttp://hbfint.blogspot.com/2011/11/19-happy-islamic-new-year.html