...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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परिभाषा
कुछ दर्द ऐसे भी होते हैं कि जो फटते नहीं, फासले अगर बढ़ने लगें तो फिर घटते नहीं।
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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देशवासियों तुम हमें सत्ता देंगे तो हम तुम्हें गुजारा भत्ता देंगे। सारे भूखे-नंगों की जमात को, बिजली-पानी, कपड़ा-लत्ता देंगे। ...

इस कार्टून प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
ReplyDeleteयदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।
waah !
ReplyDelete.... पर अंकल मिलेंगे कहां??
ReplyDeleteहा-हा-हा-हा चंद्रमौलेश्वर जी , आपकी मंशा भी कुछ नेक लग रही है :)
ReplyDeleteदुःख हुआ कल टी वी पर देखकर । एक व्यक्ति को अर्थव्यवस्था के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता ।
ReplyDeleteडा० साहब, क्या कहना चाह रहे है आप ? कि सबको थप्पड़ मारो :)
ReplyDeleteगोदियाल जी , गुनहगार तो भरे पड़े हैं । लेकिन क्या एक विक्षिप्त मनुष्य के थप्पड़ से कुछ हासिल होने वाला है ?
ReplyDeleteबहुत खूब सूरत है जिसने भी छठा मारा किसी ब्याक्तिगत शत्रुता के नाते नहीं मारा यह सब देश हित में है.
ReplyDeleteGood one ....
ReplyDeleteआपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आइये और अपने अनमोल संदेशों के द्वारा हमारा उत्साह बढाइये/आप हिंदी की सेवा इसी तरह अपने मेहनत और लगन से लिखी गई रचनाओं द्वारा करते रहें यही कामना है /आभार /लिंक नीचे दिया गया है /
ReplyDeletehttp://hbfint.blogspot.com/2011/11/19-happy-islamic-new-year.html