Monday, November 23, 2009

फिर सनक गया दिमाग कार्टून बनाने को.....







ट्वींकल-ट्वींकल औल दि नाईट !

रविवार की व्यस्तता की वजह से कल रात को कुछ खास नही लिख पाया ! लोग कहते हैं कि इंसान का कबाडी(साहित्यिक) दिमाग पैदाइशी होता है, एक हास्य (पैरोडी कहना पता नही कहां तक उचित होगा, मुझे नही मालूम) तब लिखी थी, जब नौवीं-दसवीं मे पढ्ता था ! और मेरा तो यह मानना है यह एक ऐसी पोएम थी, जिसे ज्यादातर लोगो ने समय-समय पर अपने तरीके से भिन्न-भिन्न रूपों मे प्रस्तुत किया, आइये आपको भी सुनाता हूं! कुछ व्याकरण की गलतियों को जो उस समय पर मेरे हिसाब से सही थी, मैने उनमे सुधार नही किया, शब्द अगर अशोभनीय लगे तो अग्रिम माफ़ी !

ट्वींकल-ट्वींकल औल द नाईट
जीरो वाट की धुमली लाईट
वन मिड नाईट वेन माई वाइफ़ वज
डीपली सिलेप्ट ऐट माई लेफ़्ट साईड
सपने मे सी सौ अ पिक्चर,
ऐज वह ट्रैवलिंग इन अ ऐयर फ़्लाईट
जिसमे सौ हर मोस्ट ब्युटी,
भेरी डेंजरस अ ग्रीडी काईट
हर ब्युटिफुल फ़ेस हैड डर के मारे,
तुरन्त बिकेम फ़्रोम रेड टु वाईट
ऐट लास्ट जब काइट रीच्ड नियर हर,
बचाओ-बचाओ ! सी क्राईड
मै जागा ऐन्ड वोक्ड हर अप
बाय हर आर्म्स सी होल्ड मी वेरी टाईट
सुन कर हर व्वाइस अवर पडोसी,
सोचा दिस कि दे हैव अ फाईट
पर जब दे पीप्ड विन्डो से अन्दर,
बोले, अच्छा फूल बनाया राइट-राइट
ट्वींकल-ट्वींकल औल द नाईट
जीरो वाट की धुमली लाईट

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24 Comments:

Blogger नीरज गोस्वामी said...

कार्टून और कविता दोनों ने आनंद ला दिया...वाह
नीरज

Monday, 23 November, 2009  
Blogger Unknown said...

वाह! ये तो हिन्दी-अंग्रेजी का जोरदार घालमेल है।

Monday, 23 November, 2009  
Blogger Mithilesh dubey said...

बहुत खूब सर जी , कविता और कार्टुन दोनो लाजवाब रहें।

Monday, 23 November, 2009  
Anonymous Anonymous said...

संयुक्त घोषणा पत्र में लिखिएगा- 'ठाकरे परिवार' ! कार्टून और कविता का संगम मज़ेदार है।

Monday, 23 November, 2009  
Blogger निर्मला कपिला said...

गर ये सनक है तो ऐसी सनक रोज़ आये बहुत बडिया कविता भी और कार्टून भी बधाई

Monday, 23 November, 2009  
Blogger सदा said...

दोनो ही काम आपने दिल से किये हैं तभी तो इन दोनों की कोई मिसाल नहीं, बधाई के साथ शुभकामनायें ।

Monday, 23 November, 2009  
Blogger mehek said...

cartoon aur kavita dono jabardast waah

Monday, 23 November, 2009  
Blogger Kamlesh Sharma said...

मजेदार कविता और कार्टून

Monday, 23 November, 2009  
Blogger Dr. Shreesh K. Pathak said...

कविता और कार्टून...एक साथ..और वो भी अच्छे-अच्छे..वाह..गोदियाल साहब..वाह..!

Monday, 23 November, 2009  
Blogger चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

ट्वींकल-ट्वींकल औल द नाईट
जीरो वाट की धुमली लाईट
जब ले रहे थे सपनों की फ़्लाइट
पत्नी ने ली क्लास लेफ़्ट एण्ड राइट
जब खुली नींद एट ट्विलाइट :)

Monday, 23 November, 2009  
Blogger संजय बेंगाणी said...

वेरी बिग स्माइल.

Monday, 23 November, 2009  
Blogger अजय कुमार said...

कविता अच्छी है लेकिन कार्टून लाजवाब है

Monday, 23 November, 2009  
Blogger राज भाटिय़ा said...

ट्वींकल-ट्वींकल औल द नाईट
जीरो वाट की धुमली लाईट
मजेदार जी कार्टुन भी बहुत सुंदर लगा.
धन्यवाद

Monday, 23 November, 2009  
Blogger Gyan Darpan said...

मजेदार कविता और कार्टून

Monday, 23 November, 2009  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

BHAAREE-BHARKAM MAGAR
Bahut chhota sa comment.
NICE.

Monday, 23 November, 2009  
Blogger Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

कार्टून तो एकदम जबरदस्त है!!


ओर कविता के भी क्या कहने....हिन्दी-अंग्रेजी की बढिया खिचडी पकाई आपने:)

Monday, 23 November, 2009  
Blogger अजय कुमार झा said...

वाह गोदियाल जी वाह,
कार्टून कविता ..ये कंबिनेशन तो डेडली निकला जी एक दम से ..टैण टैणेन ..टेने नेनेन

Monday, 23 November, 2009  
Blogger Kirtish Bhatt said...

आप लोगों को नए नए शौक लगा रहे हैं गोदियाल साहब !!!
कल को हमारे ब्लॉग पे भी कार्टून के साथ कविता की डिमांड हो गयी तो ???? कार्टून तो ठीक है पर कविताओं के लिए कहाँ सर फोड़ने जायेंगे ??
:D

Monday, 23 November, 2009  
Blogger विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत बढ़िया शौक है और हम सब को भी बढ़िया लगता है..बनाते रहिए कार्टून और कविता तो है ही लाज़वाब..मजेदार .

Monday, 23 November, 2009  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

@Kritish Bhatt,
भट्ट साहब सर्वप्रथम मेरे ब्लॉग पर पधारने के लिए आपका हार्दिक शुक्रिया ! हाँ आपकी बात सत्य है, मैं तो वैसे कविता ही ज्यादा लिखता हूँ कार्टून तो बस आप लोगो की देखा देखी करके बना दिया, लेकिन आपका concern उचित है आगे से कार्टून के साथ कविता नहीं प्रस्तुत करूंगा :)

Tuesday, 24 November, 2009  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

ट्वींकल-ट्वींकल औल द नाईट
जीरो वाट की धुमली लाईट ...

वाह गोदियाल साहब ......... कार्टून तो कमाल का है ही .......... ये हिन्दलिश की कविता भी लाजवाब है ......... मज़ा आ गया ......

Tuesday, 24 November, 2009  
Blogger Alpana Verma said...

badhiya cartoon!

Tuesday, 24 November, 2009  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

Waah! bahut badhiya laga cartoon.... aur kavita ke to kya kahne.....

Tuesday, 24 November, 2009  
Blogger ललित शर्मा said...

गोदियाल जी हम भी सनक गये हैं इसलिए आपकी पुरानी पोस्ट पढ रहे हैं -आप भी सनकते रहिए, कुछ नया निकल कर ही आयेगा-और आपके दुसरे ब्लाग पर मैने एक कमेंट किया था-कृपया ध्यान दे।

Wednesday, 25 November, 2009  

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