Thursday, November 26, 2009

आह्वान- उठ, जाग मुसाफिर जाग !

कद्र जहां शान्ति की हो , वहां शान्ति का इजहार कर,
किंतु, वैरी  न माने प्यार से  तो, पलटकर  वार कर।

हम तो 
सदा से शान्ति के, पथ पर ही चलते आये है,

किन्तु ऐवज मे अमूमन,जख्म ही देह ऊपर पाये है,
जिल्लत उठाई है बहुत,मुगल,फिरंगियो से हारकर,
अब अगर वैरी  न माने प्यार से ,पलटकर वार कर।  

आखिर इसतरह कब तक सहेंगे ,जुल्म सहना पाप है,
है दुष्ट-दानव दर पे बैठा, जो मानवता पर 
अभिशाप है,

छद्म युद्ध थोंपा है हमपर ,निरपराधों का नरसंहार कर,
अब अगर वैरी  न माने प्यार से ,पलटकर वार कर।  

बेइंसाफी की आहटों पर, चुप  न बैठों  नजरें फेरकर ,
 दुश्मन लगे लांघने हदें जब , तो मोरो उसे घेरकर,
पहल खुद से ना हो अन्याय की, ऐंसा व्यवहार कर

अब अगर वैरी  न माने प्यार से ,पलटकर वार कर।   


दिन प्रतिदिन दुश्मनो का हौंसला,हो रहा उन्मत्त है,
उठ, जाग मुसाफ़िर जाग, अभी भी पास तेरे वक्त है,

कोई समझे न बात को शिष्टता से, उससे तकरार कर,
अब अगर वैरी  न माने प्यार से ,पलटकर वार कर।  

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22 Comments:

Blogger Unknown said...

"पर दुश्मन न माने प्यार से, पलटकर तू वार कर!"

यही श्री कृष्ण ने अर्जुन से भी कहा था!

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger आचार्य ललित मुनि said...

जो प्यार दे उसे प्यार करो
प्यार से ना माने उसका संहार करो

जय हिंद

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger निर्मला कपिला said...

अन्याय की आहट पे गर, तू खुद ही नजरें फेर लेगा,
इसे शत्रु अशक्तता समझकर, आ तुझे फिर घेर लेगा,
लोग कायर समझ बैठे , ऐंसा न कोई व्यवहार कर,
गर दुश्मन न माने विनम्रता से, पलटकर वार कर !
और आखिरी पहरा बहुत ही अच्छा लगा लाजवाब रचना है बधाई

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger राजीव तनेजा said...

अगर दुश्मन न माने प्यार से, पलटकर वार कर !

सत्य वचन...


आज हँसते रहो पर गाँधी जी के साथ आपकी फोटो लगाई है... http://hansteraho.blogspot.com/2009/11/blog-post_26.html

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger सदा said...

गर दुश्मन न माने विनम्रता से, पलटकर वार कर !

बहुत ही सुन्‍दर भाव, एवं सत्‍यता के निकट हर पंक्ति, आभार के साथ शुभकामनायें ।

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

Godiyal ji..... RAM....RAM....



छिपकर सदा की तरह, वैरी का तुझपर वार होगा,
खुद ही लड्ना है तुझे, कोई न तेरा मददगार होगा ,
जो समझे न बात को शिष्टता से, उससे तकरार कर,
गर दुश्मन न माने विनम्रता से, पलटकर वार कर !

in panktiyon ne dil ko chhoo liya....

bahut sunder abhivyakti....

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger vandana gupta said...

soye huye ko jagana aasan hota hai magar jage huye ko kaise koi jagaye..........aapki koshish lajawaab hai.

pls read-------http://redrose-vandana.blogspot.com

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सटीक और मार्मिक अभिव्यक्ति.

रामराम.

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

सरहदो पर हौंसला असुर का, हो रहा नित सशक्त है,
उठ,जाग मुसाफ़िर जाग, अभी भी पास तेरे वक्त है,
तू दे जबाब मुहतोड उसको, घाट मृत्यु के उतार कर,
अगर दुश्मन न माने विनम्रता से, पलटकर वार कर !


जब दुश्मन आकर छाती पर सवार हो जाएगा...तब सोच लेंगें कि कैसे निपटना है...अभी तो बस सोने दीजिए जनाब्!

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger अजय कुमार said...

सही है- हम कब तक दोस्ती का खेल खेलेंगे

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger kishore ghildiyal said...

palat kar tu vaar ka.......bahut achhe

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger Rajeysha said...

हमें तो आपकी इस ब्‍लॉग पोस्‍ट पर तोप तलवार तीर ही नजर आये, लगा साक्षात युद्ध ही छि‍ड़ गया है बहुत ज्‍यादा प्रभावशाली थे ये शब्‍द।


सही है शब्‍द भी तो बम बारूद जैसे ही होते हैं। पर खतरनाक बात तो ये है कि‍ इंसान ही इनका इस्‍तेमाल कर पाता है। और उसके बाद 2012 नाम की फि‍ल्‍म तो है ही।

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

मुफलिसों के तलवों जिन्दगी,
घुट-घुट के ही खो जायेगी ,
जाग मुसाफिर जाग,
वरना बहुत देर हो जायेगी,
फिर फायदा क्या,
अगर पछताना पड़े थक-हार कर,
अगर दुश्मन न माने प्यार से,
पलटकर तू वार कर !

दुशमन और प्यार.
आप भी क्या बात करते हैं सरकार!
करो दुश्मन से दुश्मनी
और मित्र से प्यार!

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger समय चक्र said...

सच कह रहे है सरकार ६० वर्षो से सो रही है .. सटीक अभिव्यक्ति.....

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

पथ अहिंसा का नितान्त, यहाँ एक श्रेष्ठतम मार्ग है,
पर दुश्मन न माने प्यार से, पलटकर तू वार कर !

पूरी तरह सहमत।
आज के परिवेश में यह अत्यन्त आवश्यक है।

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger विनोद कुमार पांडेय said...

छिपकर सदा की तरह, वैरी का तुझपर वार होगा,
खुद ही लड्ना है तुझे, कोई न तेरा मददगार होगा ,
जो समझे न बात को शिष्टता से, उससे तकरार कर,
गर दुश्मन न माने विनम्रता से, पलटकर वार कर !

आत्मविश्वास बढ़ाती और सार्थक संदेश देती हुई रचना ..हर लाइन लाज़वाब हौसला बढ़ जाता है ऐसी कविताओं के पान से..
धन्यवाद गोदियाल जी रचना बढ़िया लगी

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger राज भाटिय़ा said...

लोग कायर समझ बैठे , ऐंसा न कोई व्यवहार कर,
गर दुश्मन न माने विनम्रता से, पलटकर वार कर !
बहुत सुंदर कविता धन्यवाद

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger राज भाटिय़ा said...

अजी कसाव की मां कहा गई.... मै तो पढने आया था?

Thursday, 26 November, 2009  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

यूं हम सदा से शान्ति के, पथ पर ही चलते आये है,
किन्तु ऐवज मे हमने हमेशा, जख्म ही तो पाये है,

SACH LIKHA HAI GOUDIYAAL JI ... AAJ JAROORAT HAI TALWAAR UTHAANE KI....PALAT KAR VAAR KARNE KI ... BAHUT UTTAM RACHNA HAI ..

Friday, 27 November, 2009  
Blogger Udan Tashtari said...

सटीक!! जय हो!! जय हिन्द!!

Friday, 27 November, 2009  
Blogger Urmi said...

बहुत ही सुन्दर, सठिक, मार्मिक और भावपूर्ण रचना लिखा है आपने! हर एक पंक्तियाँ दिल को छू गई ! इस उम्दा रचना के लिए बधाई!

Friday, 27 November, 2009  
Blogger Asha Joglekar said...

अगर दुश्मन न माने प्यार से, पलटकर तू वार कर !
बिलकुल सही यही है गीता का सार ।

Friday, 27 November, 2009  

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