Friday, February 5, 2010

कौंग्रेस की इस राजनीति पर तथाकथित सेक्युलर खामोश क्यों ?

यह तो सभी जानते है कि 'फूट डालो और राज करो', यह गुरु-मन्त्र कौंग्रेस को विरासत में अंग्रेजो से मिला था, मगर वोट के लिए वे इतने छोटे दर्जे की राजनीति पर उतर आयेंगे कि इनके सिपहसलार यह भी भूल जांए कि उनके इस गैर-जिम्मेदाराना कदम से देश की सुरक्षा पर क्या असर पडेगा, तो निश्चित तौर पर यह सब इस देश के लिए एक चिंता का विषय है ! तुष्टीकरण और वोट बैंक की अपनी राजनीति के तहत कौंग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने जिस तरह आजमगढ़ के संजरपुर जाकर उन परिवारों से मिलकर , जिनके घर के युवा दहशतगर्दी में आरोपित हैं, बाद में बटला हाउस मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए यह कहा कि उन्होंने खुद बाटला हाउस में हुए मुठभेड़ में मारे गए दो युवकों के फोटोग्राफ देखे थे, जिसमें एक लड़के की सिर में गोली लगी थी, मुठभेड़ में सामने से गोली चलेगी तो पेट या सीने में लगेगी न कि सिर पर !

अब इनके इस बयान को हास्यास्पद न कहा जाए तो और क्या कहेंगे ? इन जनाव को इतना भी अहसास नहीं कि जब सामने से गोलियों की बौछार आ रही हो तो निशाने पर खडा व्यक्ति अपने को बचाने के लिए स्वाभाविक तौर पर सिर नीचे झुकाता है, और यदि पहले ही पेट में गोली लग गई हो तो गिरते वक्त आगे को झुकता है, तो सिर पर गोली लगना लाजमी है ! मगर लगता है, वोट बैंक ने इनकी इतना सोचने की क्षमता भी ख़त्म कर दी है ! IBN7 की ताजा खबर के मुताविक, किरकिरी होते देख श्री सिंह ने अब कहा है कि उन्होंने आजमगढ़ जाने के लिए श्रीमती सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी से अनुमति ली थी ! अगर यह बात सच है तो विषय और भी चिंताजनक हो जाता है, क्योंकि श्रीमती सोनिया गांधी यह भूल रही है कि मुठभेड़ के समय केंद्र और राज्य दोनों में उन्ही की सरकार थी, जिन्हें वे खुद ही परोक्ष रूप से चला रही है ! और यदि मुठभेड़ झूठी थी, तो उनकी नैतिक जिम्मेदारी क्या बनती है? खैर, कौंग्रेस की इस राजनीति से तो सभी वाकिफ है मगर आश्चर्य इस बात का है कि हमारे इन तथाकथित सेक्युलरों के मुह पर क्यों ताले लगे है? अगर यही सब कुछ बीजेपी ने किया होता तो अब तक इनका संगीत फुल वोल्यूम पर होता !

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18 Comments:

Blogger संजय बेंगाणी said...

सरकार सेक्युलरों की, भोंपू बजाने वाले सेक्युलर, काम सेक्युलरों जैसा हुआ है तो मुँह में ताला ही लगेगा ना.

Friday, 05 February, 2010  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

यह साले कांग्रेस वाले... बिन पेंदे के लोटे हैं.... फ़िज़ूल में सबके रहनुमा बने हुए हैं.... यह लोग खुद आतंकवाद का सपोर्ट कर के .... सब मुसलमानों को आतंकवादी कह रहे हैं.... और मुसलमान तो और तीन हाथ आगे हैं.... अरे! जब कोई आतंकवादी है तो है.... इनका किसी धर्म से कोई लेना देना नहीं होता है.... मुसलमानों को शिक्षा की बड़ी ज़रूरत है... नहीं ऐसे सो काल्ड सेकूलर बहकाते रहेंगे.... और यह लोग बहकते रहेंगे....

जबकि आप यह देखेंगे ...कि बी.जे.पी. के राज में मुसलमान ज्यादा सिक्युर था... कोई इशु नहीं था... और हर जगह मुसलमान टॉप कर रहा था... बी.जे.पी. के ही राज में सबसे ज्यादा नौकरियां मुसलमानों को मिली थीं....तीन साल सिविल सेवा में मुसलमानों ने ही टॉप किया था... रेलवेज़, पुलिस, बैंकिंग.... आर्मी... हर जगह मुसलमान बराबरी पर था... सिर्फ यह सेकूलर लोग दहशत बैठा कर... इन लोगों को बरगला रहे हैं.... जबसे यह कांग्रेस आई है... तबसे रोज़ कोई ना कोई बात होती ही रहती है...

Friday, 05 February, 2010  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

कॉँग्रेस ही एक ऐसी पार्टी है जो सबको साथ लेकर चल रही है!

Friday, 05 February, 2010  
Blogger drdhabhai said...

शरम आती है ऐसे लोगों पर और इनकी घिनौनी राजनीति पर

Friday, 05 February, 2010  
Blogger Unknown said...

मैं पहले भी कह चुका हूं, आगे भी कहूंगा… कि सेकुलरिज़्म का लबादा ओढ़कर इस देश में कुछ भी किया जा सकता है,,, "देशद्रोह" भी, फ़िर भी माफ़ हो जायेगा…

Friday, 05 February, 2010  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

@ शास्त्री जी, जोक पसंद आया !

Friday, 05 February, 2010  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

महफूज भाई गाली नही बकते हैं?
सभी के रिश्तेदार विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में है!
राजनीति की दलदल में कोई भी पार्टी पाक-साफ नही है!

Friday, 05 February, 2010  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

आदरणीय शास्त्री जी....

गाली लिखने के लिए माफ़ी चाहता हूँ... थोडा रौ में लिख बैठा... माफ़ी चाहता हूँ....

मैं सिस्टम से बहुत परेशां हूँ...... इसीलिए ज़बान खराब हो ही जाती है... माफ़ी चाहता हूँ....

Friday, 05 February, 2010  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

अब देखिये ना... उत्तर प्रदेश पी.सी.एस. में सेलेक्शन होने के बावजूद भी आज तक जोइनिंग नहीं मिली है.... अगर सही समय पर जोइनिंग मिल जाती तो आज कहीं का डी.एम. होता.

Friday, 05 February, 2010  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

महफूज भाई, वाकई आपके धैर्य को नमन ! अगर कोई और होता या फिर उ.प. में बीजेपी सत्ता में होती तो अपने ही बहुत सारे सेक्युलर यह आरोप मढ़ चुके होते कि इनके(संघियों ) राज में अल्पसंख्यको के साथ भेदभाव हो रहा है !

Friday, 05 February, 2010  
Anonymous Anonymous said...

आपको मालूम होना चाहिए कि जो 'खालिस धर्मनिरपेक्ष' होते हैं, वो लिखते कम सुनते ज्यादा हैं। यहां यह भी जोड़ लें; ये लोग तस्लीमा के मुद्दे पर मुंह बंद रखते हैं लेकिन फिदा हुसैन पर... क्या कहूं।

Friday, 05 February, 2010  
Blogger अजय कुमार said...

ऐसी हरकतें करके कांग्रेस क्या हासिल करना चाहती है ? खुद धर्म की राजनीति करते हैं , दूसरे को साम्प्रदायिक कहते हैं ।

Friday, 05 February, 2010  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

सच कह रहे हैं ........ मीडीया ने इस बात को इतनी मजबूती से नही उठाया .......... आख़िर मैडम का राज है .........

Friday, 05 February, 2010  
Blogger Udan Tashtari said...

नो कमेंट!

Friday, 05 February, 2010  
Blogger दीपक 'मशाल' said...

अरे सर ऐसा सच मत कहिये... आलाकमान नाराज़ हो जायेगा... वो ग़ज़ल नहीं सुनी क्या?-- 'सच्ची बात कही थी मैंने... लोगों ने सूली पे चढ़ाया.... मुझको ज़हर का जाम पिलाया...'
जय हिंद... जय बुंदेलखंड

Saturday, 06 February, 2010  
Blogger Unknown said...

गोदियाल जी! राजनीति के विषय में अपने तो अज्ञानी ही हैं फिर भी इतना अवश्य जानते हैं कि आपने सही लिखा है कि "फूट डालो और राज करो', यह गुरु-मन्त्र कौंग्रेस को विरासत में अंग्रेजो से मिला ..."।

Saturday, 06 February, 2010  
Blogger Asha Joglekar said...

दिग्विजय जी से मध्यप्रदेश में कुछ करते न बना तो अब आला कमान को कुश करने के लिये (तुष्टीकरण) आजमगढ चले गये पर पांसा उलटा पड गया । पार्टी कोई भी हो वोटों की राजनीती कर के सत्ता में जमे रहना ही असली मकसद है ।

Saturday, 06 February, 2010  
Blogger Sulabh Jaiswal "सुलभ" said...

अपन देश में तो एक ही राज परिवार है. वैसे भी गांधी जी ने अपना ठेका सिर्फ नेहरु को दिया था. नेहरु जी तो ज्ञानी आदमी थे, विदेशी नवाबों के संगत में थे. सारे फार्मूले वे जानते थे. इंदिरा जी से सोनिया और प्रियंका तक ये फार्मूले पहुँच गए. लेकिन अपने भोंदू राजुकुमार इन फार्मूले पर चलना नहीं सीख पा रहे हैं. ये तो चमचे की फ़ौज है सो वे मैदान में कूद गए.
मजाल है कोई और जमीनी कांग्रेसी नेता अपने इस देश का नेत्रित्व अपने हाथ में ले ले.

बहरहाल सेकुलरों को भड़कने के लिए एक इशारा काफी होता है. मगर असली चाभी तो विदेशों में गिरवी रखी हुई है.

Saturday, 06 February, 2010  

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