Wednesday, April 29, 2020

लॉकडाउन को-रोना की घरेलू हिंसा।



गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे है,
तमाशाई बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे क्यों रूठे है। 

डरी सी सूरत बता रही,बिखरे महीन कांच के टुकडो की,
कुपित सुरीले कंठ से कहीं कुछ, कड़क अल्फाज फूटे है। 

ताफर्श पर बिखरा चौका-बर्तन, आहते पडा चाक-बेलन,
इन्हें देखकर भला कौन कहेगा कि ये बेजुबाँ सब झूठे है। 

पटकी जा रही हर चीज, जो पड़ जाए कर-कमल उनके,  
वाअल्लाह, बेरुखी-इजहार के उनके, अंदाज ही अनूठे है। 

तनिक शुश्रुषा की कमी 'परचेत',मनुहार मिलाना भूल गए,
फकत इतने भरसे बदन के सारे, सुनहरे तिलिस्म टूटे है। 


6 Comments:

Blogger Meena Bhardwaj said...

सादर नमस्कार,

आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (01-05-2020) को "तरस रहा है मन फूलों की नई गंध पाने को " (चर्चा अंक-3688) पर भी होगी। आप भी
सादर आमंत्रित है ।

"मीना भारद्वाज"

Thursday, 30 April, 2020  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत खूब

Thursday, 30 April, 2020  
Blogger प्रतिभा सक्सेना said...

अपने ऊपर का कंट्रोल ही खो बैठे, खिसियानी बिल्ली बना डाला लॉकडाउन ने .

Friday, 01 May, 2020  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

😂🙏

Friday, 01 May, 2020  
Blogger अनीता सैनी said...

वाह !लाजवाब अभिव्यक्ति आदरणीय सर.
सादर

Friday, 01 May, 2020  
Blogger InternationalSchool said...

This lockdown people are getting frustrated and certainly odd things will happen. Keeping the most deserving candidate of your house busy is the job of school through online and assignment. best international school in Mumbai.

Friday, 16 July, 2021  

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