Friday, February 23, 2024

द्वंद्व !

 











निरुपम अनंत यह संसार इतना, क्या लिखूं,

ऐतबार हुआ है तार-तार इतना, क्या लिखूं ।


सर पर इनायतों का दस्तार इतना, क्या लिखूं 

है मुझपर आपका उपकार इतना, क्या लिखूं ।


और न सह पायेगा मन भार इतना, क्या लिखूं,

दिल व्यक्त करे तेरा आभार इतना, क्या लिखूं। 


सरेआम डाका व्यवहार पर इतना, क्या लिखूं,

दिनचर्या में लाजमी आधार इतना, क्या लिखूं।


इस दमघोटू परिवेश में भी दम ले रहा 'परचेत',        

है इस ग़ज़ल का दुरुह सार इतना, क्या लिखूं ।

4 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

वाह

Sunday, 25 February, 2024  
Blogger हरीश कुमार said...

बेहतरीन पंक्तियाँ

Sunday, 25 February, 2024  
Blogger Sudha Devrani said...

और न सह पायेगा मन भार इतना, क्या लिखूं,

दिल व्यक्त करे तेरा आभार इतना, क्या लिखूं।
वाह!!!

Sunday, 25 February, 2024  
Blogger दीपक कुमार भानरे said...

सुन्दर पंक्तियाँ , आदरणीय .

Sunday, 25 February, 2024  

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