Friday, December 12, 2025

व्यथा

 तुझको नम न मिला

और तू खिली नहीं,

ऐ जिन्दगी !

मुझसे रूबरू होकर भी

तू मिली नहीं।

7 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

वाह

Friday, 12 December, 2025  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Saturday, 13 December, 2025  
Blogger M VERMA said...

Wahhh

Wednesday, 17 December, 2025  
Blogger हरीश कुमार said...

बहुत अच्छा

Wednesday, 17 December, 2025  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Thursday, 18 December, 2025  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Thursday, 18 December, 2025  
Blogger Admin said...

ये चार पंक्तियाँ बहुत चुपचाप दिल में उतर जाती हैं। तुमने ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं की, बस एक सादा-सा सवाल रख दिया। मुझे इसमें अधूरापन, इंतज़ार और थोड़ी थकान साफ़ दिखती है। ऐसा लगता है जैसे सामने सब कुछ था, फिर भी पकड़ में कुछ नहीं आया।

Monday, 09 February, 2026  

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