Sunday, November 8, 2009

तांक-झांक, एस एम एस की निराली दुनियां मे!

आप और हम, आज के इस तकनीकी युग मे कमप्युटर और ट्वीटर की दुनियां मे कुछ ज्यादा ही मस्त हो गये है। लेकिन हमारे पीछे साहित्यिक मनोरंजन की एक और दुनिया भी है, सेल फोन पर एस एम एस की दुनियां। आज जैसा कि विदित है, साप्ताहिक छुट्टी का दिन है, अत: फुरसत के इन्ही पलो में मैंने यहाँ झाँकने की कोशिश की! आइये चले, और देखें कि इस दुनियां मे क्या चल रहा है (सुविधा हेतु, कुछ सन्देशो का हिन्दी रूपान्तर भी प्रस्तुत किया है) ;

पहला एस एम एस:
कर दिया इजहारे इश्क हमने मोबाईल पर,
लाख टके की बात, एक रुपये मे हो गई !

दूसरा एस एम एस:
आई लब यू…
आई लब यू …
आई लब यू….
आई लब यू…
यार, गलत मत समझना, डाक्टर लोग कहते है कि पागलों को प्यार से ही हैन्डल करना चाहिये ।
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सरदार जी: अर्ज किया है …….
यशोमती मैया से बोले नन्द लाला…
वाह-वाह…
यशोमती मैया से बोले नन्द लाला…
मां,
टाटा स्काई लगा डाला तो
लाईफ़ झिंगालाला…
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इन्सानी सम्बन्ध एक पेड की तरह होते है,
जो शुरुआत मे देख भाल मांगते है , लेकिन अगर एक बार सम्रद्ध हो गये तो फिर जिन्दगी भर आपको छांव देते है , हर सुख-दुख में !

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जब बारिश होती है तो सारे पक्षी कहीं शरण ढूढते है, सिवाए चील के, जो बारिश से बचने के लिये बाद्ळों से ऊपर चला जाता है । समस्यायें हर एक के साथ समान होती है, मगर एक नजरिया ही है, जो औरों से भिन्न होता है।

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कागज की कश्ती थी, पानी का किनारा था,
खेलने की मस्ती थी, दिल ये आवरा था ,
कहां आ गये इस समझदारी के दल-दल मे ,
वो नादां बचपन ही कितना प्यारा था !
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समस्या, उम्मीदों और वास्तविक्ताओं के बीच की दूरी है, इसलिये या तो कम की उम्मीद करो और वास्तविक्ता को स्वीकारो, या फिर..ढेरो उम्मीदे रखो और उसे वास्तविक्ता मे बदलो !
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रेस मे जीतने वाला घोडा यह नही जानता कि वह किस लिये दौडा था, वह तो मार पड्ने और दर्द की वजह से दौडा ! इसी तरह जिन्दगी भी एक रेस ही है, जहां भग्वान आपका घुड्सवार है, इसलिये यदि आप किसी दर्द मे है तो ये समझिये कि भग्वान आपको जिताना चाहता है।
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अगर तुम्हें कोई मेरे से अच्छा दोस्त मिले, और तुम उसके साथ जाना चाहो, तो मैं तुम्हे रोकुंगा नही, लेकिन जब वह तुम्हे छोड कर चला जाये, तो पीछे मुड्कर देखना , मैं वहां हुंगा तुम्हे थप्प्ड मारने के लिये, और यह कह्ने के लिये कि मार ली होश्यारी !
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कभी जब तुम मुझे तुम्हे निहारते हुए देख लो तो ये मत सोचना कि मैं तुम्हे इस लिये देख रहा हूं कि तुम सुन्दर लग रही हो, मेरी मा कह्ती है कि शैतानों की पूंछ होती है और मैं तुम्हे निहार यही तलाशने की कोशिश करता रहता हूं कि तुम्हारी पूंछ किधर है ?
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परीक्षा हाल मे फर्रा ले जाये, उसे खुर्चे, अपने नज्दीकी अध्यापक को दिखाये, और प्रिन्सिपल के दफ़्तर तक की फ्री ट्रिफ पाये और फिर घर मे बेहिसाब छुट्टियों का मजा ले !
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रक्षा वन्धन पर एक एस एम एस: लडकियों के हाथ मे कोई लावारिश वस्तु देखें तो वहां से तुरन्त ही भाग जाये क्योंकि यह वस्तु राखी हो सकती है, और आपकी जरा सी लापरवाही आपको भाई बना सकती है !
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दोस्ती किसी गीले सीमेन्ट पर खडे होने जैसा है, जितनी अधिक देर आप ठ्हरोगे आपके पैर जमते जायेंगे, और यदि आप वहां से निकल भी गये तो बिना पैरो के निशां छोडॆ नही जा सकते।
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जब कभी आप यह देखना चाहे कि आप कितने धनवान है तो अपने खजाने को मत गिनिये, सिर्फ़ आख से एक आंसू निकाले और देखे कि कितने हाथ उसे फोजने के लिये उठ्ते है ।
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हर चांद मिले, हर सितारा मिले,
जिन्दगी मे कभी अकेले न रहो आप ,
आपको कोई हम जैसा मिले
कोई हम से भी प्यारा मिले
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देखो जानी ! फ़ायर को आग कह्ते है,
कोबरा को नाग कह्ते है,
गार्डन को बाग कह्ते है ,
और जो तुममे मिसिंग है,
उसको दिमाग कहते है !

और अन्त मे…
नोट: अगर आप सिगरेट नही पीते, अगर आप दारू नही पीते,अगर आप मटरगश्ती नही करते, आप का कोई दोस्त भी नही है, आप जुआ भी नही खेलते, गलत बात भी नही करते
तो कृपया हमारी वेब साईट पर पधारे, वेब साइट का पता है डब्ल्यु डब्ल्यु डब्ल्यु डोट अबे पैदा क्यों हुए थे डौट कौम……!

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16 Comments:

Blogger ललित शर्मा said...

वाह वाह वाह-गोदियाल जी-आनंद आ गया।

Sunday, 08 November, 2009  
Anonymous Anonymous said...

ये लास्ट वाला यु आर एल ट्राई कर रहा हूँ... खुलता ही नहीं है :)

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger M VERMA said...

वाह क्या कहने.
आदि से अंत तक अनंत
बहुत खूब

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger अजय कुमार झा said...

वाह एस एम एस की दुनिया खूब समेटी आप ने ..मजा आ गया ॥

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger अजित गुप्ता का कोना said...

गोदियाल जी
क्‍या पूरी ही पी एच डी कर डाली एस एम एस पर। सच पूछिए बहुत ही गुदगुदाया इस पोस्‍ट ने। एक से एक बेहतरीन एस एम एस। किस की चर्चा करूं और किसे छोडूं?

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger Urmi said...

वाह वाह क्या बात है! बहुत बढ़िया लिखा है आपने! बहुत खूब!

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger Ambarish said...

inmein se kai pahle istemaal kar chuke hain ham!!!

ye wala pahli baar dikha..
कागज की कश्ती थी, पानी का किनारा था,
खेलने की मस्ती थी, दिल ये आवरा था ,
कहां आ गये इस समझदारी के दल-दल मे ,
वो नादां बचपन ही कितना प्यारा था !
jagjit singh yaad aaye...
bacchon ke nanhe haathon ko,
chand sitare chune do..
char kitabein padhkar wo bhi,
ham jaise ho jayenge...
परीक्षा हाल मे फर्रा ले जाये, उसे खुर्चे, अपने नज्दीकी अध्यापक को दिखाये, और प्रिन्सिपल के दफ़्तर तक की फ्री ट्रिफ पाये और फिर घर मे बेहिसाब छुट्टियों का मजा ले !
nahi ismein to risk factor bahut jyada hai!!!

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger Unknown said...

"यार, गलत मत समझना, डाक्टर लोग कहते है कि पागलों को प्यार से ही हैन्डल करना चाहिये।"

बहुत खूब!

सुन्दर कलेक्शन प्रस्तुत किया आपने!

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger राज भाटिय़ा said...

जब कभी आप यह देखना चाहे कि आप कितने धनवान है तो अपने खजाने को मत गिनिये, सिर्फ़ आख से एक आंसू निकाले और देखे कि कितने हाथ उसे फोजने के लिये उठ्ते है ।
बहुत सुंदर जी मजा आ गया, आप क जबाब नही,धन्यवाद

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

wah! wah! maza aa gaya.......

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger vandana gupta said...

waah.......mazaa aa gaya.

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger रंजीत/ Ranjit said...

khub hasaya hai apne, hasne ke baad main soch me dub gaya ... it's really great writting

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

waah majaa aa gaya Godiyaal saahab ... ek se badh kar ek hain ... sab naye naye ...

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger Unknown said...

ha ha ha ha ha

Sunday, 08 November, 2009  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

गोदियाल जी!
आप खुश किस्मत हैं।

Monday, 09 November, 2009  
Blogger Udan Tashtari said...

हा हा, मस्त मजेदार संकलन!!

Monday, 09 November, 2009  

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