सार्थक प्रस्तुति। -- आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (25-01-2015) को "मुखर होती एक मूक वेदना" (चर्चा-1869) पर भी होगी। -- सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। -- बसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ... सादर...! डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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8 Comments:
सुन्दर कविता। शुभकामनाओं में आपको वसंत भेजते हैं।
सार्थक प्रस्तुति।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (25-01-2015) को "मुखर होती एक मूक वेदना" (चर्चा-1869) पर भी होगी।
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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बसन्तपञ्चमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत सुन्दर l वसंत पंचमी की सुभकामनाएँ l
वसंत पंचमी
सार्थक रचना
Aapko bhee Vikesh ji !
सुन्दर सार्थक रचना ...
आपको वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें ...
सुन्दर आराधना...माँ सरस्वती सभी पर ज्ञान रूपी आशीर्वाद बरसाती रहें!!
सुन्दर सार्थक रचना
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