ऐ साल 2020 !
असहज छटपटाहट,
नकाबी हितस्वार्थ,
अहंवादी हठता और
प्रतिद्वंद्विता की शठता,
शाश्वत चीखती रह गई
कुछ सर्द सी आजमाइशें।
है फैला चहुंओर,
इक तिजा़रती शोर,
बेचैन दिल के अंतस मे ही
कहींं दफ्ऩ होकर के रह गई ,
कुछ कुत्ती सी ख्वाहिशें।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
असहज छटपटाहट,
नकाबी हितस्वार्थ,
अहंवादी हठता और
प्रतिद्वंद्विता की शठता,
शाश्वत चीखती रह गई
कुछ सर्द सी आजमाइशें।
है फैला चहुंओर,
इक तिजा़रती शोर,
बेचैन दिल के अंतस मे ही
कहींं दफ्ऩ होकर के रह गई ,
कुछ कुत्ती सी ख्वाहिशें।
5 Comments:
सही कहा आपने सर... यह साल हमेशा याद रहने वाला है.....सुन्दर अभिव्यक्ति....
कुत्ती सी। क्या बात है :)
🙏
बहुत खूब।
जाते हुए साल को प्रणाम।
🙏
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