Monday, March 16, 2026

पुनर्विवरण !

रातों के हर पहर-दोपहर, 

जब भी  मैं करवट बदलूं,

बदली हुई हर करवट पर, 

कसम से आहें भरता हूं ,

उम्र पार कर चुका प्रेम की वरना,

 कह देता कि  मैं तुमपर मरता हूं ,

मत पूछो, ये नशा कौन सा करता हूं,

 सच में, मैं तुम्हें बतानें से डरता हूं।


4 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर

Tuesday, 17 March, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🤣

Tuesday, 17 March, 2026  
Blogger Admin said...

यार, ये लाइन्स दिल की हालत साफ दिखाती हैं। आपने बिना ज्यादा शब्दों के गहरी फीलिंग पकड़ ली है। मुझे यह बात बहुत असली लगी कि आप प्यार छुपाने की बात करते हो, क्योंकि कई बार लोग सच में ऐसा ही महसूस करते हैं। हर करवट पर याद आना और फिर भी खुलकर न कह पाना, यही तो असली कशमकश है।

Saturday, 28 March, 2026  
Blogger reena said...

Nice Post.
Lakshmi Ji Ki Aarti

Wednesday, 01 April, 2026  

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