मन की हकीकत
न हमारा ईमान बचा, न ही पहचान बची,
बतलाएं भी तो बतलाएं, तुम्हें क्या सची,
उम्मीदों और यादों के सहारे, ऐ 'परचेत',
थोड़ी सी ख्वाहिशों की बस, जां बची।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
3 Comments:
सुंदर
Nice Post.
hanuman chalisa
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