Thursday, March 12, 2026

वज़ह!

गर तुम न खरीददार  होते,

यकीन मानिए, 

टके-दो-टके में भला कौन बिकता?

मुहब्बत बिकाऊ न है और न थी

कभी,

बस, निवेश गलत किया है तुमने,

इसीलिए घर में "धन" नहीं टिकता।