...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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चटोरों की....
मैंने ख्वाब देखा था, ख्वाहिश अधूरी रही, चाटने वाले चाट गए, प्लेट साफ पूरी रही।
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...

कार्टून बहुत कुछ बोलता है!
ReplyDeleteवाकई कार्टून कुछ क्या बहुत कुछ बोलता है !!
ReplyDeleteआभार-
ReplyDeleteझिंझोड़ते संवाद -
कार्टून समझ में आ जाए तो बोलता है नही तो
ReplyDeleteमात्र फोटो,,,,
recent post: कैसा,यह गणतंत्र हमारा,
You are absolutely right bro.
ReplyDeleteThanx for sharing with us.
बिल्कुल सही नब्ज पकडी.
ReplyDeleteरामराम
सही है, बुला लो भाई.
ReplyDeleteकिस किस को ले जाएगा
ReplyDeleteबीटिंग द रिट्रीट ऑन ब्लॉग बुलेटिन आज दिल्ली के विजय चौक पर हुये 'बीटिंग द रिट्रीट' के साथ ही इस साल के गणतंत्र दिवस समारोह का समापन हो गया ! आज की 'बीटिंग द रिट्रीट' ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !
ReplyDelete:-)
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