Wednesday, January 16, 2013

आश्चर्य !!


बहस-मुबाहिसा 
ये है कि  'पा ' जी ने 
घटना के आठ दिन बाद 
कुछ बोला है,
गोले नहीं दागे 
तो क्या ,
ये क्या कम है कि 
महामात्य ने मुहँ खोला है।      
कह दो जाकर 
हर मतदाता 
नए-पुराने वालों को, 
बदहाली और बदइंतजामात 
पर गुर्राने वालों को।   
वतन की आबरू का 
सरपरस्त बनाया खुद तुमने ,  
शव से कफ़न और 
सच से दामन चुराने वालों को।। 

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परिवार सँवारना  ही 
जीवन की रेल समझते थे जो,
बन्धनों में बंधना ही  
दिलों का मेल समझते थे जो, 
पूर्व - प्रवेश परीक्षा में 
असफल रहे कई ऐसे माँ-बाप, 
नर्सरी में दाखिले को 
बच्चों का खेल समझते थे जो।  

15 comments:

  1. पूर्व - प्रवेश परीक्षा में असफल रहे कई ऐसे माँ-बाप,
    नर्सरी के दाखिले को बच्चों का खेल समझते थे जो।।
    ..सच अब समय बहुत बदल गया है ..जो न बदला वह आज के समय के लायक नहीं ..
    बहुत बढ़िया

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  2. अच्छे भविष्य के लिये माता पिता साक्षात्कार देते घूम रहे हैं..

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  3. 'चुप्पा मुंह 'बोला ये क्या कम है न।

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  4. वाह, दोनों सटीक हैं. शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  5. बहुत बढ़िया

    बधाई आदरणीय ।।


    पा जी राजी तब हुवे, समझ सके जब फिल्म ।

    आठ दिनों तक था नहीं, घटना का भी इल्म ।

    घटना का भी इल्म, कराना था एडमीशन ।

    नातिन को नर्सरी, और राहुल को ट्यूशन ।

    कोई भी इस्कूल, नहीं ना दिग्गी राजी ।

    रहा इधर मशगूल, उधर सिर काटे पाजी ।।

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  6. बहुत सार्थक और सटीक...

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  7. आजकल नर्सरी में दाखिला दिलाना मुश्किल काम हैं भगवन उनकी इच्छा पूरी करे :)

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  8. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।।

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  9. शानदार मारक क्षमता युक्त...

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  10. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त (समृद्ध भारत की आवाज़)
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  11. सार्थक और सटीक!
    बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

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  12. 'क्या कम है कि महामात्य ने मुहँ खोला है।'
    भगवान करे अब मुँह खुला ही रहे!

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  13. हां.;मुंह तो खोला है..सही कहा आपने..है बड़ी बात

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  14. 'क्या कम है कि महामात्य ने मुहँ खोला है।'
    ये क्या कम है?
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