Wednesday, August 19, 2009

जिन्ना तो जैसे, मक्का हो गया !

कम-से-कम दो का इस युग में,
जन्नत पाना पक्का हो गया,
आज इन राम-भक्तो के लिए,
जिन्ना तो जैसे, मक्का हो गया !

पहले तो खूब जी भरकर,
बस हिंदुत्व का ही राग अलापा,
कन्याकुमारी से कश्मीर तक,
रथ चढ़ के राम का नाम जापा !

चढावे पे हाथ साफ़ कर चुके तो,
जाम रथ का चक्का हो गया,
आज इन राम-भक्तों के लिए,
जिन्ना तो जैसे, मक्का हो गया !

पहले लाल-हरे कृष्ण हो गए थे,
अबके हनुमान कर गया काम,
घर का भेदी ही लंका ढा गया,
अब तेरा क्या होगा, हे राम !

जिसे तराशा सांचे ढाल कर,
खोटा वह टक्का हो गया,
आज इन राम-भक्तों के लिए,
जिन्ना तो जैसे,मक्का हो गया !

3 comments:

  1. आज इन राम-भक्तों के लिए,
    जिन्ना तो जैसे,मक्का हो गया !

    क्या बात है गोदियाल साहब... भाई वाह...
    अभी एक दो और आएंगे... इन्तेज़ार कीजिये...

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  2. पहले लाल-हरे कृष्ण हो गए थे,
    अबके हनुमान कर गया काम,
    घर का भेदी ही लंका ढा गया,
    अब तेरा क्या होगा, हे राम !


    बहुत अच्छी पंक्तिया कही अपने !!!!!!
    जिन्ना का भूत अभी पीछ नहीं छोड़ने वाला

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  3. वाह ........क्या बात है गोदियाल साहब... आपकी कलम ने आज जादू कर दिया ...........
    करार व्यंग है राजनीति पर ........ बी.जे.पी की .......

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