Monday, August 17, 2009

सभी ब्लोगर मित्रो से एक सवाल !

दोस्तों ! हो सकता है कि मेरा सवाल आप लोगो के लिए कोई विशेष महत्व ना रखता हो, फिर भी आप लोगो से निवेदन करूंगा कि यदि आप लोग इस बारे में कोई विशेष जानकारी रखते हो, तो कृपया देने का कष्ट करे! मेरे जहन में यह सवाल बहुत लम्बे अरसे से घूम रहा है, जिसका मै ठोस जबाब अभी तक नहीं ढूंढ पाया !

क्या भारत के राष्ट्रपति लाल किले पर आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लेते है ? यदि नहीं तो क्यों ?

13 comments:

  1. सवाल तो दमदार है, यदि बंटवारे की बात की जाये कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री और 26 जनवरी को राष्ट्रपति…। लेकिन फ़िर प्रधानमंत्री 26 जनवरी को कार्यक्रम में क्यों आते हैं? 15 अगस्त की बजाय 14 अगस्त को राष्ट्रपति का लाइव सन्देश अवश्य प्रसारित होता है, लेकिन 15 अगस्त को समारोह में उपस्थित होने में क्या बुराई है…

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  2. इस सवाल के बारे में कभी सोचा नहीं. प्रोटोकाल की कोई बात तो नहीं?

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  3. India became formally independent from the United Kingdom on 15 August 1947 and the country became a Commonwealth dominion. The Monarch of India was represented by the Governor-General of India, now appointed by George VI - King of India upon the advice of the Prime Minister of India, instead of the British government.

    This was a temporary measure, however, as the continued existence of a shared monarch in the Indian political system was not considered by some appropriate for a truly sovereign nation. The first Governor General of India, Lord Mountbatten, was also the last British Viceroy of India before independence. He soon handed power over to C. Rajagopalachari, who became the only ethnically Indian governor general. In the meantime, the Constituent Assembly led by Dr. Rajendra Prasad . The drafting was finished on 26 November 1949, and the Constitution was formally adopted on 26 January 1950—a date of symbolic importance as it was on 26 January 1930, that Indian National Congress had first issued the call for complete independence from Britain. When the constitution took effect, the Governor General and King were replaced by an elected president, with Rajendra Prasad serving as the first President of India.

    The move ended India's status as a Commonwealth dominion, but the republic remained in the Commonwealth of Nations. Nehru argued that a nation should be allowed to stay in the Commonwealth simply by observing the British monarch as "Head of the Commonwealth" but not necessarily head of state. This was a ground-breaking decision that would set a precedent in the second half of the twentieth century for many other former British colonies to remain in the Commonwealth after becoming newly-independent republics.

    iska matlab haen ki 1947 mae raashtrpati ki padvi thee hee nahin
    baad mae protocol hogayaa kyuki pradhanmatri sae raashtrpati ki padvi badii hotee haen

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  4. इसका मतलब हैं की १९४७ मे राष्ट्रपति की
    पदवी थी ही नहीं
    बाद मे प्रोटोकॉल होगया क्युकी
    प्रधानमत्री से राष्ट्रपति ki पदवी बड़ी
    होती हैं

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  5. 1947 में भारत गणतन्त्र नही था।
    इससे ज्यादा मुझे नही पता।
    आपको कुछ और जानकारी मिले
    तो मुझे भी बताना।

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  6. अरे भाई, वो चौदह अगस्त की रात को अपना संदेस देकर थक जाते हैं, सुबह उठने में देर हो जाती है। जब सारे नेता साळ भर सोते रहते है तो अध्यक्ष के नाते राष्ट्रपति को इतना तो अधिकार होना चाहिए ना:)

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  7. सर्वप्रथम आप सभी लोगो का अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए हार्दिक शुक्रिया ! मगर मैं समझता हूँ कि मेरा सवाल अपनी जगह अभी भी ज्यों का त्यों ही खडा है ! रचना जी ने जो स्पष्ठीकरण दिया, हो सकता है कि उसमे काफी हद तक सच्चाई हो, लेकिन जबाब को मैं ठोश नहीं समझता! कुछ लोग यह भी कहते है कि चूँकि राष्ट्रपति को उसी वक्त पर राष्ट्रपति भवन में भी ध्वजारोहण करना होता है, इसलिए वे लाल किले पर शरीक नहीं होते ! लेकिन यह तर्क भी मुझे नहीं जंचता!

    जैसा कि मैंने पहले स्पष्ट किया कि मुझे इसका ठोस जबाब अभी तक नहीं मिल पाया है और ना ही मैं इसकी कोई जानकारी रखता हूँ ! लेकिन अगर इसका सीधा सम्बन्ध सिर्फ इस प्रोटोकोल से है कि देश आजाद १५ अगस्त १९४७ को हो गया था, जबकि राष्ट्रपति अस्तित्व में १९५० में आये, तो आप लोगो को नहीं लगता कि जिस देश के बड़े-बड़े विद्वान और ज्ञांता, जिस देश की सेकुलर सरकारे हम लोगो को हमारे पूर्वजो द्वारा स्थापित की गई उन सदियों पुरानी परम्पराओं को महज एक अंधविश्वास, रूढिवादिता, और ढकोसले बाजी कहकर, हमें उसे त्यागने के उपदेश देते फिरते है, वे खुद अंधविश्वास और रूढीवादिता के दल-दल में फंसे है! १९४७ और ५० में क्या स्थिति थी उसका इस बात से क्या लेनादेना कि चूँकि उस समय (१९४७) में लाल किले पर राष्ट्रपति के लिए कोई सीट आरक्षित नहीं थी, इसलिए आज भी एक सीट न हीं लगाईं जा सकती ! उसमे हर्ज क्या है यदि देश का सर्वोच्च पदाधिकारी १५ अगस्त समारोह में सम्मिलित होता है तो ?

    यदि उपरोक्त कारण ही इसकी एक वजह है तो क्या वे कुछ आधुनिक विद्वान, जो पुरानी बातो को त्यागने की पुरजोर वकालात करते फिरते है, मेरे इस सवाल का जबाब देंगे ?

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  8. On 26 january the PM welcoms the president which will not be possible on 15th august as PM is the chief guest on 15th august

    President is the highest post so there HAS TO BE A PROTOCOL

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  9. नेहरू 15 अगस्त को झंडा फहरा कर अमर होना चाहते थे. कोई बताए उस समय उनकी क्या हैसियत थी? किस अधिकार से फहराया? फिर वे प्र.म. बने और हर 15 अगस्त को फहराने लगे. यही परम्परा बन गई. वे रा.प. बनते तो आज 15 अगस्त को रा.प. फहराते. जय हिन्द.

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  10. agreed with Rachna Singh......... very gud answrr and to the point...... and no need of amelioration.....

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  11. प्रथम नागरीक भी समारोह में हिस्सा ले यह अपेक्षित है.

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अवंत शैशव !

यकायक ख़याल आते हैं मन में अनेक,  मोबाईल फोन से चिपका आज का तारुण्य देख,  बस,सोशल मीडिया पे बेसुद, बेखबर,  आगे, पीछे कुछ आत...