व्यथा

 तुझको नम न मिला

और तू खिली नहीं,

ऐ जिन्दगी !

मुझसे रूबरू होकर भी

तू मिली नहीं।

Comments

  1. ये चार पंक्तियाँ बहुत चुपचाप दिल में उतर जाती हैं। तुमने ज़िंदगी से कोई शिकायत नहीं की, बस एक सादा-सा सवाल रख दिया। मुझे इसमें अधूरापन, इंतज़ार और थोड़ी थकान साफ़ दिखती है। ऐसा लगता है जैसे सामने सब कुछ था, फिर भी पकड़ में कुछ नहीं आया।

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