Saturday, December 6, 2025

उलझनें

 थोडी सी बेरुखी से  हमसे जो

उन्होंने पूछा था कि वफा क्या है,

हंसकर हमने भी कह दिया कि

मुक्तसर सी जिंदगी मे रखा क्या है!!


1 comment:

बहुरूपिये!

अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत,  किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी, रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर जमाने के आगे कुछ कम ही दिखा...