उलझनें

 थोडी सी बेरुखी से  हमसे जो

उन्होंने पूछा था कि वफा क्या है,

हंसकर हमने भी कह दिया कि

मुक्तसर सी जिंदगी मे रखा क्या है!!


Comments

  1. वाह, आपने तो दो ही शेरों में पूरा रिश्ता खोल कर रख दिया। मुझे इसमें हल्की सी तंज भी दिखती है और गहरी सी चोट भी। जब कोई बेरुखी से वफ़ा पूछता है, तब सवाल से ज़्यादा उसका अंदाज़ चुभता है। आपने जो जवाब दिया, उसमें एक तरह की थकान और सच्चाई दोनों झलकती हैं।

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