थोडी सी बेरुखी से हमसे जो
उन्होंने पूछा था कि वफा क्या है,
हंसकर हमने भी कह दिया कि
मुक्तसर सी जिंदगी मे रखा क्या है!!
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
कुशल नेतृत्व और दृढ़ संकल्प के लिए ५६ इंच की छाती ढूंढते हैं, और रोज़मर्रा के संचालन के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति ढूंढते हैं
सही कहा अपना ...
ReplyDeleteवाह, आपने तो दो ही शेरों में पूरा रिश्ता खोल कर रख दिया। मुझे इसमें हल्की सी तंज भी दिखती है और गहरी सी चोट भी। जब कोई बेरुखी से वफ़ा पूछता है, तब सवाल से ज़्यादा उसका अंदाज़ चुभता है। आपने जो जवाब दिया, उसमें एक तरह की थकान और सच्चाई दोनों झलकती हैं।
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