हां, उलझनें हैं क्योंकि
बीच हमारे अनबन है,
दरमियां फासले हैं, मगर
मिलने का भी मन है।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
तुझे न पा सकने का मुझे मलाल तो था, क्यों न पा सका, दिल मे ये सवाल तो था, न पा सकने की चाहे वजह कोई भी रही हो, वो पल था,दिन था,महिना था औ...
ये चार पंक्तियाँ बहुत सच्ची और दिल के करीब लगती हैं। आप रिश्तों की उस हालत को पकड़ लेते हैं, जहाँ मन नाराज़ भी होता है और मिलने की चाह भी छोड़ता नहीं। अनबन, फासले और उलझनें सब होते हुए भी उम्मीद बची रहती है, यही बात इसे खास बनाती है।
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