दीवार सामर्थ्य की और तू फांद मत,
अपनी औकात में रह, हदें लांघ मत,
संवेदनाएं अगर जिंदा रहे तो अच्छा है,
बेरहम बनकर उन्हें खूंटी पे टांग मत।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे थे, तमाशबीन बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे से रूठे थे। डरी सूरत बता रही थी,बिखरे महीन कांच क...
आप दोस्त की तरह समझाते है कि ताकत दिखाने से पहले अपनी सीमा पहचानो। मैं इसमें घमंड के खिलाफ साफ चेतावनी देखता हूँ। दीवार फांदने की हड़बड़ी अक्सर इंसान को गिरा देती है। लेखक संवेदनाओं की बात करके बात को और गहरा बना देता है।
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