Tuesday, December 23, 2025

ऐ धोबी के कुत्ते!

सुन, प्यार क्या है,

तेरी समझ में न आए तो,

अपने ही प्यारेलाल को काट खा,

किंतु, ऐ धोबी के कुत्ते!

औकात में रहना, ऐसा न हो,

न तू घर का रहे, न घाट का।


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