कोई दयार-ए-दिल की रात मे
वहां चराग सा जला गया,
जो रहता था कभी उधर,
सुना है, अब वो शहर चला गया।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
मंजूर तेरी हर ख्वाहिश, भले ही तू मेरे पास मत रहना, बस, इतनी सी आरज़ू है , अकेले तू उदास मत रहना।
यह शेर दिल को सीधे छू जाता है, दोस्त। आप दो पंक्तियों में पूरी कहानी कह देते हैं। दिल की रात, जलता चराग और फिर उसका चला जाना, सब कुछ बहुत सादा और बहुत गहरा लगता है।
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