Tuesday, December 23, 2025

सुनो पथिक!



कोई  दयार-ए-दिल की रात मे

वहां चराग सा जला गया,

जो रहता था कभी उधर,

सुना है, अब वो शहर चला गया।



1 comment:

  1. यह शेर दिल को सीधे छू जाता है, दोस्त। आप दो पंक्तियों में पूरी कहानी कह देते हैं। दिल की रात, जलता चराग और फिर उसका चला जाना, सब कुछ बहुत सादा और बहुत गहरा लगता है।

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इश्क़-ए-सर्दी

मांग रही थी वो आज मुझसे  मेरे प्यार का हलफनामा, मौर्निग वाक पर जाती है जो पहनकर, रोज मेरा ही गर्म पजामा।