थोडी सी बेरुखी से हमसे जो
उन्होंने पूछा था कि वफा क्या है,
हंसकर हमने भी कह दिया कि
मुक्तसर सी जिंदगी मे रखा क्या है!!
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
गलियां सब वीरां-वीरां सी, उखड़े-उखड़े सभी खूंटे थे, तमाशबीन बने बैठे दो सितारे, सहमे-सहमे से रूठे थे। डरी सूरत बता रही थी,बिखरे महीन कांच क...
सही कहा अपना ...
ReplyDeleteवाह, आपने तो दो ही शेरों में पूरा रिश्ता खोल कर रख दिया। मुझे इसमें हल्की सी तंज भी दिखती है और गहरी सी चोट भी। जब कोई बेरुखी से वफ़ा पूछता है, तब सवाल से ज़्यादा उसका अंदाज़ चुभता है। आपने जो जवाब दिया, उसमें एक तरह की थकान और सच्चाई दोनों झलकती हैं।
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