Sunday, February 19, 2012

नासमझ !
















कर ले तू भी थोड़ी सी वफ़ा जिन्दगी से,
होता क्यों है इसकदर खफा जिन्दगी से।  


बढ़ाए जा कदम तू ख्वाइशों के दर पर,
मुहब्बत फरमाके इकदफा जिन्दगी से।  


बिगड़ने न दे दस्तूर तू जमाने का ऐसे,
रखले थोड़ा कमाकर नफ़ा जिन्दगी से।  


मत कर बयां राज बेतकल्लुफी के ऐंसे
कि मिले जो बदले में जफा जिन्दगी से।   


ऐतबार बनने न पाये बेऐतबारी का सबब,
जोड़ 'परचेत' इक फलसफा जिन्दगी से।    


छवि  गूगल  से  साभार ! 

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11 Comments:

Blogger भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

फिर पूरे नम्बर...

Sunday, 19 February, 2012  
Blogger M VERMA said...

की होती अगर थोड़ी वफ़ा जिन्दगी से,
तो होते न इस कदर खफा जिन्दगी से !

सच तो यही है
बहुत सुन्दर

Sunday, 19 February, 2012  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

बड़े बड़े फलसफे सिखा जाती है ज़िन्दगी

Sunday, 19 February, 2012  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

सच ! नासमझ ही तो हैं ।
अति सुन्दर ।

Sunday, 19 February, 2012  
Blogger चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

वफ़ा को दफ़ा करने में ही नफ़ा है॥

Sunday, 19 February, 2012  
Blogger लोकेन्द्र सिंह said...

सबका हाल कह गए अपनी कविता से।

Monday, 20 February, 2012  
Blogger  डॉ. मोनिका शर्मा said...

बढ़ाए जो कदम होते ख्वाइशों के दर पर,
मुहब्बत फरमाकर इक दफा जिन्दगी से !

Bahut Hi Sunder

Monday, 20 February, 2012  
Blogger Anupama Tripathi said...

ऐतबार बनता न बेऐतबारी का सबब,
जुड़ जाता जो इक फलसफा जिन्दगी से !

बहुत सुंदर ...

Monday, 20 February, 2012  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

ये नासमझी कभी कभी कितना दुःख दे जाती है ... मस्त लिखा है गौदियाल जी ...

Monday, 20 February, 2012  
Blogger अशोक सलूजा said...

दिल को छू गई आप के दिल से निकली ...
इस अनपढ़ को भी !
किये क्यों बयां राज बेतकल्लुफी के ऐंसे,
बदले में पाई जो हरदम जफा जिन्दगी से !
भाई जी ,स्वस्थ रहो ,मस्त रहो!

Monday, 20 February, 2012  
Blogger Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

वाह एक उम्दा ग़ज़ल. ☺

Monday, 20 February, 2012  

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