Saturday, February 18, 2012

कार्टून कुछ बोलता है- जर्मन हाउसिंग लोन घोटाला !

14 comments:

  1. यहाँ पर बहुत कम नेता बचेंगे तब तो..

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  2. उनकी और हमारी नैतिकता का अंतर यही है... हमारी तरह ढोंग तो नहीं करते वे कम से कम..

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  3. काश यहाँ भी कुछ ऐसा होता ....

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  4. उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

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  5. हमारे देश के नेता विचारक और दार्शनिक जो हैं । वे सोचते हैं - "एक घोटाले के बाद इस्तीफ़ा देकर स्वयं को सुखों से वंचित क्यों करना। जहाँ एक किया वहां दो चार और घोटाले कर लूं। अपनी सात पुश्तों के लिए काला धन जमा कर लूं"। इन्हें पता है यहाँ भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई होती है , कार्यवाई नहीं होती। अतः वे सुरक्षित हैं। भारत में घोटालेबाजों को अभयदान जो प्राप्त है।

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  6. हमारे यहाँ तो रंगे पुते को भी उजला ही बताते.. बेशर्मी से दोषी पद पर बने रहते...

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  7. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    --
    कल शाम से नेट की समस्या से जूझ रहा था। इसलिए कहीं कमेंट करने भी नहीं जा सका। अब नेट चला है तो आपके ब्लॉग पर पहुँचा हूँ!
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    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार के चर्चा मंच पर भी की गई है!
    सूचनार्थ!

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  8. बेवकूफ़ है... भारतीय नेताओं से सबक लेते :)

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  9. भाई गोदियाल जी आपको एक डिजिटल पेन ख़रीद ही लेना चाहिये.☺

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  10. फ़िर देश लूटने/चलाने के लिये नेता कहाँ से आयेंगे?

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  11. यही फर्क है ..

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  12. पूरा भारत राष्ट्र नेता विहीन हो जायगा फिर तो ...

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