यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
nice cartoon.
ReplyDeleteयहाँ पर बहुत कम नेता बचेंगे तब तो..
ReplyDeleteउनकी और हमारी नैतिकता का अंतर यही है... हमारी तरह ढोंग तो नहीं करते वे कम से कम..
ReplyDeleteकाश यहाँ भी कुछ ऐसा होता ....
ReplyDeleteउत्कृष्ट प्रस्तुति।
ReplyDeleteहमारे देश के नेता विचारक और दार्शनिक जो हैं । वे सोचते हैं - "एक घोटाले के बाद इस्तीफ़ा देकर स्वयं को सुखों से वंचित क्यों करना। जहाँ एक किया वहां दो चार और घोटाले कर लूं। अपनी सात पुश्तों के लिए काला धन जमा कर लूं"। इन्हें पता है यहाँ भ्रष्टाचार के खिलाफ लडाई होती है , कार्यवाई नहीं होती। अतः वे सुरक्षित हैं। भारत में घोटालेबाजों को अभयदान जो प्राप्त है।
ReplyDeletekaash !
ReplyDeleteहमारे यहाँ तो रंगे पुते को भी उजला ही बताते.. बेशर्मी से दोषी पद पर बने रहते...
ReplyDeleteबेवकूफ़ है... भारतीय नेताओं से सबक लेते :)
ReplyDeleteभाई गोदियाल जी आपको एक डिजिटल पेन ख़रीद ही लेना चाहिये.☺
ReplyDeleteफ़िर देश लूटने/चलाने के लिये नेता कहाँ से आयेंगे?
ReplyDeleteयही फर्क है ..
ReplyDeleteपूरा भारत राष्ट्र नेता विहीन हो जायगा फिर तो ...
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