ख्वाइश !
आ जाए बस कोई इक यार बनके,
रहन - कश्ती का खेवनहार बनके,
बस मेरा किरदार बनके इक अनूठा, चलेगा।
फहर फर-फर सावन फुहार छनके ,
प्रीत में झनक झन रूह-तार झनके,
प्रेम सच्चा करे हमसे या झूठा-मूठा, चलेगा।
खनन खन-खन सागर द्वार खनके,
साहिलों से टकराके पतवार खनके,
दिल भले साबूत मिले या टूटा-फूटा, चलेगा।
सुघड सज-धज बन बार-बार ठनके,
ठुमकठम-ठुमकियाँ देह-धार ठनके,
खुश रहे पल-पल सदा या रूठा-रूठा, चलेगा।
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11 Comments:
सुन्दर प्रस्तुति
चलेगा नहीं दौड़ेगा.
बहुत खूब, सुन्दर ...
वाह ख़्वाहिश तो बढ़िया है
अनूठी दुनिया में सब ठूँठ से अचम्भित खड़े हैं।
फोटो में पीछे दिखने वाला यार बहुत खतरनाक है। :)
खनन खन-खन सागर द्वार खनके,
साहिलों से टकराके पतवार खनके,
दिल भले साबूत मिले या टूटा-फूटा,चलेगा।,,,,
बेहतरीन प्रस्तुति,,,,अजी,,बिलकुल चलेगा,,,
RECENT POST शहीदों की याद में,
बेहतरीन प्रस्तुति......
फहर फर-फर सावन फुहार झनके,
प्रीत में झनक झन रूह-तार झनके,
प्रेम सच्चा करे हमसे या झूठा-मूठा, चलेगा ..
बिलकुल चलेगा ... बस एहसास तो हो ...
nice :-)
वाह लाजवाब ख्वाहिश. पर ताऊ इतना शरीफ़ सा क्य़ूं बैठा है?
रामराम.
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