Saturday, February 2, 2013

ख्वाइश !










आ जाए बस कोई इक यार बनके,
रहन - कश्ती का खेवनहार बनके, 
बस मेरा किरदार बनके इक अनूठा, चलेगा।

फहर फर-फर सावन फुहार छनके ,   
प्रीत में झनक झन रूह-तार झनके, 
प्रेम सच्चा करे हमसे या झूठा-मूठा, चलेगा। 

खनन खन-खन सागर द्वार खनके,   
साहिलों से टकराके पतवार खनके,
दिल भले साबूत मिले या टूटा-फूटा, चलेगा। 

सुघड सज-धज बन बार-बार ठनके, 
ठुमकठम-ठुमकियाँ  देह-धार ठनके,  
खुश रहे पल-पल सदा या रूठा-रूठा, चलेगा।  

13 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति

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  2. आप की ये खूबसूरत रचना शुकरवार यानी 8 फरवरी की नई पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...
    आप भी इस हलचल में आकर इस की शोभा पढ़ाएं।
    भूलना मत

    htp://www.nayi-purani-halchal.blogspot.com
    इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है।

    सूचनार्थ।

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  3. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवार के चर्चा मंच पर ।।

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  4. वाह ख़्वाहिश तो बढ़िया है

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  5. अनूठी दुनिया में सब ठूँठ से अचम्भित खड़े हैं।

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  6. फोटो में पीछे दिखने वाला यार बहुत खतरनाक है। :)

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  7. खनन खन-खन सागर द्वार खनके,
    साहिलों से टकराके पतवार खनके,
    दिल भले साबूत मिले या टूटा-फूटा,चलेगा।,,,,

    बेहतरीन प्रस्तुति,,,,अजी,,बिलकुल चलेगा,,,

    RECENT POST शहीदों की याद में,

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  8. बेहतरीन प्रस्तुति......

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  9. फहर फर-फर सावन फुहार झनके,
    प्रीत में झनक झन रूह-तार झनके,
    प्रेम सच्चा करे हमसे या झूठा-मूठा, चलेगा ..

    बिलकुल चलेगा ... बस एहसास तो हो ...

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  10. वाह लाजवाब ख्वाहिश. पर ताऊ इतना शरीफ़ सा क्य़ूं बैठा है?

    रामराम.

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