यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
हा हा हा -
ReplyDeleteहा हा हा -
क्षमा सहित-
कैसा भैंसा किस तरफ, दाएँ बाएँ बोल |
दृष्टि-दोष जग को हुआ, लगता किसका मोल |
लगता किसका मोल, लगे दोनों ही तगड़े |
नीयत जाए डोल, कहीं होवे ना झगड़े |
राम राम हे मित्र, मिले गर ग्राहक ऐसा |
बिना मोल बिक जाय, स्वयं से रविकर भैंसा |
:):) अब तो अपनी औकात दो कौड़ी की भी नहीं है ॥
ReplyDeleteकौन पार्टी का समर्थक है ये भैंसा .
ReplyDeleteअपने से तो ये भैंसा ही अच्छा, प्रणाम इस महिषासुर को .:)
ReplyDeleteकहाँ से आया था ये भैंसा ... किसने पाल पास के इसे इस लायक बनाया ...
ReplyDeleteभैंसा करोड़ का और हम कौड़ियों के मोल ..
ReplyDeleteमहिषासुर मर्दनी को लाओ .
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