...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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हकीकत
उजागर न होने दिया हमने उजागर न करने के ऐब से, वाकिफ बहुत खूब थे हम, तुम्हारे छल और फरेब से।
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
हा हा हा -
ReplyDeleteहा हा हा -
क्षमा सहित-
कैसा भैंसा किस तरफ, दाएँ बाएँ बोल |
दृष्टि-दोष जग को हुआ, लगता किसका मोल |
लगता किसका मोल, लगे दोनों ही तगड़े |
नीयत जाए डोल, कहीं होवे ना झगड़े |
राम राम हे मित्र, मिले गर ग्राहक ऐसा |
बिना मोल बिक जाय, स्वयं से रविकर भैंसा |
:):) अब तो अपनी औकात दो कौड़ी की भी नहीं है ॥
ReplyDeleteकौन पार्टी का समर्थक है ये भैंसा .
ReplyDeleteअपने से तो ये भैंसा ही अच्छा, प्रणाम इस महिषासुर को .:)
ReplyDeleteकहाँ से आया था ये भैंसा ... किसने पाल पास के इसे इस लायक बनाया ...
ReplyDeleteभैंसा करोड़ का और हम कौड़ियों के मोल ..
ReplyDeleteमहिषासुर मर्दनी को लाओ .
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