अफसोस ये भी...
चलचित्र को बदनाम किया,
स्वार्थी,चरित्रहीन खानों ने,
वतन को नीचा दिखलाया,
कुछ बिके हुए इन्सानों ने।
स्वार्थी,चरित्रहीन खानों ने,
वतन को नीचा दिखलाया,
कुछ बिके हुए इन्सानों ने।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
1 Comments:
:):) :)
कुछ कहाँ हैं बहुत सारे हैं हर जगह हैं बिके हुऐ
कुछ दिखते हैं सामने रहते हैं बाकी रहते हैं छिपे हुऐ।
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home