Wednesday, June 3, 2020

नसीहत-ए-कोरोना।

सांसे जकडकर भी कह रहा कोविड-१९
बेटा, जंग जारी रख, हिम्मत न हारना।
मगर याद रहे, जिंदगी का ये फलसफा,
खटिया से बाहर कभी पैर मत पसारना।।

सहुलियत ही नहीं, हुनर से भी सीढियां चढ,
सोच का दायरा बढा, 'मैं' से भी आगे बढ।
आस़ां है कर्ज लेना, मुश्किल है उतारना,
खटिया से बाहर कभी पैर मत पसारना।।

अभी ताजा तुझको, यह ऐहसास कराया है,
जो निर्भीक कहता था खुदको, उसे डराया है।
कितनी कठिन है जिंदगी, पिंजड़े मे गुजारना,
खटिया से बाहर कभी पैर मत पसारना।।

गुजरी थी कभी जो मदमस्त होकर, वो जवानी
बुरा जो वक्त आया तो मांग न सकी पानी।
दुनियांं बहरी हो 'परचेत',तो फिजूल है पुकारना,
खटिया से बाहर कभी, पैर मत पसारना।।

10 comments:

  1. सार्थक और सटीक रचना

    ReplyDelete
  2. सादर नमस्कार,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शुक्रवार (05-06-2020) को
    "मधुर पर्यावरण जिसने, बनाया और निखारा है," (चर्चा अंक-3723)
    पर भी होगी। आप भी सादर आमंत्रित है ।

    "मीना भारद्वाज"



    ReplyDelete
  3. सामयिक और सुन्दर सुझाव के साथ सार्थक रचना।

    ReplyDelete
  4. बिलकुल सही कोराना को हराना है तो सावधानी रखे
    सुन्दर रचना

    ReplyDelete
  5. सार्थक प्रस्तुति यथार्थ को इंगित करती.
    वाह !लाजवाब

    ReplyDelete
  6. सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete

रूबरू बोतल..

औकात मे रह, वरना मैं तुझे फोड डालूंगा... सच्ची कह रहा हूँ... दूर रह मुझसे, वरना...  मैं तुझे तोड डालूंगा। माना कि तुझे मैंने खूब, पिया भी व ...